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Strokes of Life is not a love story, but a lifelong story – a story about holding on, when the whole world is talking about letting go.

Raj and Vira – different like salt and sugar; like chalk and cheese; like moonlight and sunshine. From the chrome encased office to the snowy peaks of Switzerland, their story is one that brings much meaning and fulfilment. Yet, reality comes to burst their bubble and distance takes the place of togetherness in no time. The final blow to their relationship comes when they realise that they can never have a child. Heartbroken Vira decides to let Raj go so he may follow his dreams. With a promise to come back, Raj leaves. Twenty years later, a reputed writer, Viraj rewrites their story in bold strokes with a young girl at the heart of it all – Nandini.

Find out how the connections are made, and how adversity brings them together in a single stroke rendered by the paintbrush called fate.

क्या ज़िंदगी में सुकून के पल मोहब्बत के पलों से ज़्यादा मायने रखते हैं? क्या ज़िंदगी को देखने के दो विभिन्न नज़रिए के लोगों को साथ में वक़्त गुज़ार कर सुकून महसूस हो सकता है? क्या कोई इंसान हमें इतना अज़ीज़ हो सकता है कि साथ ना होकर भी हम उस से किया हुआ वादा ज़िंदगी भर निभाते रहे?

कीर्ति और मिलिंद कॉलेज के वक्त से अच्छे दोस्त थे। दोनों ने साथ में MBA की पढ़ाई पूरी कर एक साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। कुछ वक़्त के बाद दोनों ने अपनी ज़िंदगी की अलग अलग राहें चुनी। पचास साल की उम्र में मिलिंद पेशे से कवि था और कीर्ति कॉर्पोरेट की दुनिया में एक चमचमाता सितारा। दोनों अपने अपने घर परिवार और अपनी ज़िंदगियों में व्यस्त थे। लेकिन उन्होंने अलग-अलग रास्तों पर जाने से पहले एक दूसरे से ये वादा किया था कि जब कभी दोनों एक ही शहर में होंगे, तो हर महीने की आख़िरी शुक्रवार को थोड़ी देर के लिए ज़रूर मिलेंगे। वो वादा वो ज़िंदगी के तीन दशक से ज़्यादा गुज़र जाने के बावजूद आज भी निभा रहे थे।

अगर दोनों के बीच इतना लगाव था तो दोनों ने अपनी ज़िंदगी साथ क्यों नहीं गुज़ारी? क्यों दोनों ने दो अलग-अलग हमसफ़र का हाथ थामा और साथ चलकर भी ज़िंदगी की राह पर अलग अलग चलते रहे?

ये कहानी ऐसे ही एक शुक्रवार को उनके मुलाक़ात की कहानी है जिसमें कीर्ति ने मिलिंद से वहीं सवाल दोहराएँ। वो सवाल जिसके जवाब अलग-अलग होकर भी उन दोनों के लिए एक थे। 

राहुल और रूमी एक ही सोसाइटी में रहते हैं। रूमी को जानवरों से प्यार है और राहुल को अपनी सोसायटी में जानवर बिलकुल पसंद नहीं है। इसी बात पर आये दिन दोनों के बीच में तकरार होती रहती है।

पर वक्त आने पर एक दिन रूमी का एक जानवर दोस्त राहुल की कुछ ऐसी मदद करता है, जिससे उसकी जिंदगी का एक बहुत बड़ा हादसा टल जाता है। उस घटना से राहुल की बेघर जानवरों के प्रति जो भावना होती है, वो हमेशा के लिए बदल जाती है।

आखिर एक जानवर ऐसा क्या कर सकता है जो एक इंसान की सोच को हमेशा के लिए बदल दे? 

राघव और रोशनी एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। राघव को रोशनी से प्यार है पर रोशनी को उसके वजूद का भी एहसास नहीं है। एक दिन राघव रोशनी को प्रपोज़ करने की कोशिश करता है पर आख़िरी वक़्त में किसी कारणवश पीछे हट जाता है। पढ़ाई खत्म कर दोनों अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं।

सालों बाद ऑफिस से घर लौटते वक्त एक शेयर टैक्सी में राघव की एक अजनबी महिला से मुलाक़ात होती है। बातों बातों में वो महिला उसे अपने कॉलेज के जमाने का एक किस्सा बयां करती है। वह बताती है कि कैसे कॉलेज में उसका एक गुमनाम आशिक हुआ करता था और अफसोस जताती है कि वो उसे कभी मिल नहीं पायी। थोड़ी दूर जाने के बाद महिला टैक्सी से उतरकर अपने रास्ते चली जाती है। पर उसकी कहीं बातें राघव को उसके कॉलेज के प्रपोज़ल की याद दिला जाती है।

कौन थी वह महिला और उसकी बातों में ऐसा क्या था जो कुरेद देती है राघव के अतीत की उस परत को, जिसे वह अपने वर्तमान में कहीं विलीन कर चुका था? 

रिया और दुष्यंत बिज़नेस पार्टनर हैं और लिव इन रिलेशन में रहते हैं। एक महामारी के फैलने की वजह से रिया की मृत्यु हो जाती है और दुष्यंत उसके गम में टूट कर बिखर जाता है।

एक दिन सपने में कृष्ण आकर दुष्यंत को दुखों से बाहर निकलने का उपाय समझाते है। नींद से जागने के बाद दुष्यंत का दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है और वो महामारी से ग्रसित लोगों की मदद करने की ठान लेता है।

आखिर वो क्या उपाय है जो एक इंसान को उसके दुखों से छुटकारा दिला सकता है? 

हिन्दी कविताओं का संग्रह